Wednesday, 16 January 2019

उठो, धरा के अमर सपूतों | Utho Dhara Ke Amar Saputo | Desh Bhakti Song lyrics in hindi

पुन: नया निर्माण करो

उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।
जन-जन के जीवन में फिर से
नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो।
नई उमंगें, नई तरंगें
नई प्रात है नई बात है
नया किरन है, ज्योति नई।
नई-नई मुस्कान भरो।
नई आस है, साँस नई।
युग-युग के मुरझे सुमनों में
डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।1।।
मस्त उधर मँडराते हैं।
नए स्वरों में गाते हैं।
गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें
पुन: नया निर्माण करो।।2।।
नवयुग की नूतन वीणा में
नया राग, नव गान भरो।
नई सुनहरी काया है।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
कली-कली खिल रही इधर
वह फूल-फूल मुस्काया है।
धरती माँ की आज हो रही
पुन: नया निर्माण करो।।3।।
नूतन मंगलमय ध्वनियों से
गुँजित जग-उद्यान करो।
शत-शत दीपक जला ज्ञान के
उठो, धरा के अमर सपूतों।
सरस्वती का पावन मंदिर
शुभ संपत्ति तुम्हारी है।
तुममें से हर बालक इसका
रक्षक और पुजारी है।
नवयुग का आह्वान करो।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।4।।
-द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

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