Wednesday, 16 January 2019

Sare jahan se auchha | सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा। रबिन्द्रनाथ टैगोर

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी वह गुलिस्तां हमारा ॥
ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में।
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा ॥
वो संतरी हमारा वो पासवां हमारा ॥
परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का।
गुलशन है जिसके दम से रश्के जिनां हमारा॥
गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां।
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।
ऐ आबे रोदे गंगा वह दिन है याद तुझको।
उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा ॥
अब तक मगर है बाकी नामों निशां हमारा ॥
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा ॥
यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहां से।
मालूम क्या किसी को दर्दे निहां हमारा ॥
कुछ बात है कि हस्ती मिटती मिटाये।
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा ॥
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहां में।
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसतां हमारा॥
-- रबिन्द्रनाथ टैगोर

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