Sunday, 15 September 2019

Deshbhakti Shayari


Bharatmata Ke Liye Mar Mitna Kabool Hai Mujhe,
Akhand Bharat Banane Ka... Junoon Hai Mujhe.

भारतमाता के लिए मर मिटना कबूल है मुझे,
अखंड भारत बनाने का... जूनून है मुझे।

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“लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा
मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा”

===

Yahin Rahunga Kahin Umr Bhar Na Jaunga,
Zameen Maa Hai Ise Chhod Kar Na Jaunga.

यहीं रहूँगा कहीं उम्र भर न जाउँगा,
ज़मीन माँ है इसे छोड़ कर न जाऊँगा।

===

“आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे
बची हो जो एक बूंद भी लहू की
तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे”

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Teen Rang Ka Nahi Vastr, Ye Dhvaj Desh Ki Shaan Hai,
Har Bhartiy Ke Dilo Ka Svabhimaan Hai,
Yahi Hai Ganga, Yahi Hai Himalay, Yahi Hind Ki Jaan Hai
Aur Teen Rangon Mein Ranga Hua Ye Apna Hindustaan Hai.

तीन रंग का नही वस्त्र, ये ध्वज देश की शान है,
हर भारतीय के दिलो का स्वाभिमान है,
यही है गंगा, यही हैं हिमालय, यही हिन्द की जान है
और तीन रंगों में रंगा हुआ ये अपना हिन्दुस्तान हैं।

===

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये….

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Vatan Ki Khaak Zara Ediyaan Ragadne De,
Mujhe Yaqeen Hai Pani Yaheen Se Niklega.

वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियां रगड़ने दे,
मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा।

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“न पूछो ज़माने को, क्या हमारी कहानी है,
हमारी पहचान तो सिर्फ ये है, की हम सिर्फ हिन्दुस्तानी हैं”

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Lahoo Vatan Ke Shaheedon Ka Rang Laaya Hai,
Uchhal Raha Hai Zamane Mein Naam-E-Aazadi.

लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है,
उछ्ल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी।

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“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पे मर मिटने वालों का बाकी यही निशां होगा”

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Bharatmata Tumhen Pukare Aana Hi Hoga,
Karz Apne Desh Ka Chukana Hi Hoga,
De Karake Kurbani Apni Jaan Ki,
Tumhe Marna Bhi Hoga Maarna Bhi Hoga.

भारतमाता तुम्हें पुकारे आना ही होगा,
कर्ज अपने देश का चुकाना ही होगा,
दे करके कुर्बानी अपनी जान की,
तुम्हे मरना भी होगा मारना भी होगा।

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“अनेकता में एकता ही इस देश की शान है,
इसीलिए मेरा भारत महान है”

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Dil Se Niklegi Na Mar Kar Bhi Vatan Ki Ulfat
Meri Mitti Se Bhi Ḳhushbu-E-Wafa Aaegi

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की नफरत,
मेरी मिटटी से भी खुशबू-ए-वफ़ा आयेगी।

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“खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,
मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,
करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,
तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है”

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Mere Mulk Ki Hifazat Hi Mera Farz Hai
Aur Mera Mulk Hi Meri Jaan Hai,
Is Par Kurbaan Hai Mera Sab Kuchh,
Nahi Isse Badhkar Mujhko Apani Jaan Hai.

मेरे मुल्क की हिफाज़त ही मेरा फ़र्ज है
और मेरा मुल्क ही मेरी जान है,
इस पर कुर्बान है मेरा सब कुछ,
नही इससे बढ़कर मुझको अपनी जान है।

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“जो अब तक ना खौला, वो खून नहीं पानी है,
जो देश के काम ना आये, वो बेकार जवानी है
जिंदगी जब तुझको समझा, मौत फिर क्या चीज है
ऐ वतन तू हीं बता, तुझसे बड़ी क्या चीज है”

===

Main Apne Desh Ka Hardam Samman Karta Hun,
Yahan Ki Mitti Ka Hi Gunagaan Karta Hun,
Mujhe Dar Nahin Hai Apani Maut Se,
Tiranga Bane Kafan Mera, Yahi Armaan Rakhta Hun.

मैं अपने देश का हरदम सम्मान करता हूँ,
यहाँ की मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे डर नहीं है अपनी मौत से,
तिरंगा बने कफ़न मेरा, यही अरमान रखता हूँ।



Monday, 25 February 2019

Chandan hai is desh kee mati - चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है

चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है


चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु ||
हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है
जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है
जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है || 1 ||

जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है
ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है || 2 ||

जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है
जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है
जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है || 3 ||

Chandan hai is desh kee maatee, 

Tapo bhoomi har graam hai
Har baalaa devee kee pratimaa,
Bacchaa bacchaa raam hai

Har shareer mandir saa paavan,
Har maanav upkaari hai
Jahaan siňha ban gaye khilaune,
Gaay jahaaň maa pyaari hai
Jahaaň savera shankh bajaataa,
Loree gaatee shaam hai

Lahaaň karma se bhaagya badaltaa,
Shrama nishThaa kalyaaNee hai
Tyaag aur tap kee gaathaayeň,
Gaatee kavi kee vaanee hai
Nyaan jahaaň kaa gangaa jal saa,
Nirmal hai aviraam hai

Jis ke sainik samar-bhoomi me,
Gaayaa karate geetaa hai
Jahaaň khet me hal ke neeche,
Khelaa karati seetaa hai
Jeevan kaa aadarsh jahaaň par,
Parameshvar kaa dhaam hai

Friday, 1 February 2019

BHARAT Vijayi Bhava Lyrics - भारत | Manikarnika | Shankar Mahadevan

भारत ये रहना चाहिए


देश से है प्यार तो
हरपल यह कहना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं
भारत ये रहना चाहिए

देश से है प्यार तो
हरपल यह कहना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं
भारत ये रहना चाहिए

सिलसिला ये बाद
मेरे यूँ ही चलना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं
भारत ये रहना चाहिए

मेरी नश नश तार कर दो
और बना दो एक सितार
राग भारत मुझपे छेड़ो
झन-झनाओ बार बार

देश से ये प्रेम
आँखों से छलकना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं
भारत ये रहना चाहिए

देश से यह प्रेम
आँखों से छलकना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं
भारत यह रहना चाहिए

शत्रु से कह दो ज़रा
सीमा में रहना सीख ले
ये मेरा भारत अमर है
सत्य कहना सीख ले

भक्ति की इस शक्ति को
बढ़कर दिखना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं
भारत ये रहना चाहिए

है मुझे सौगंध भारत
सौगंध भारत है मुझे
भूलूँ ना एक छन तुझे
हम्म..
रक्त की हर बूँद तेरी

है तेरा अर्पण तुझे
युद्ध ये सम्मान का है
मान रहना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं
भारत ये रहना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं
भारत ये रहना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं
भारत ये रहना चाहिए

Manikarnika movie Songs: विजय भव Vijayi Bhava – Shankar Mahadevan


Wednesday, 30 January 2019

Vande Mataram - वंदे मातरम्‌ | Desh Bhakti Geet

वंदे मातरम्‌



वंदे मातरम्‌।

वंदे मातरम्‌ ।
सुजलां सुफलां
मलयजशीतलाम्‌
सस्यश्यामलां मातरम्‌
वंदे मातरम्‌।
शुभ्रज्योत्‍स्‍नापुलकितयामिनीं
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं
सुखदां वरदां मातरम्‌
वंदे मातरम्‌।
सप्त कोटि कण्ठ कलकल निनाद कराले,
निसप्त कोटि भुजैधृत खरकरवाले,
अबला केन मा एत बले
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदलवारिणीं मातरम्‌
वंदे मातरम्‌।
तुमि विद्या, तुमि धर्म
तुमि हृदि, तुमि मर्म
त्वं हि प्राणाः शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति
हृदये तुमि मा भक्ति
तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्‌
वंदे मातरम्‌।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नामामि त्वाम्‌
कमलां अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम्‌
वंदे मातरम्‌।
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां
धरणीं भरणीं मातरम्‌
वंदे मातरम्‌। वंदे मातरम्‌।

Wednesday, 23 January 2019

झाँसी की रानी - Jhansi Ki Rani - सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan

झाँसी की रानी - Jhansi Ki Rani - Manikarnika: The Queen of Jhansi



सिंहासन हिल उठे राजवंषों ने भृकुटी तनी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सब ने मन में ठनी थी.
चमक उठी सन सत्तावन में, यह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

कानपुर के नाना की मुह बोली बहन छब्बिली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वो संतान अकेली थी,
नाना के सॅंग पढ़ती थी वो नाना के सॅंग खेली थी
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी, उसकी यही सहेली थी.
वीर शिवाजी की गाथाएँ उसकी याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वो स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना यह थे उसके प्रिय खिलवाड़.
महाराष्‍ट्रा-कुल-देवी उसकी भी आराध्या भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ बन आई रानी लक्ष्मी बाई झाँसी में,
राजमहल में बाजी बधाई खुशियाँ छायी झाँसी में,
सुघत बुंडेलों की विरूदावली-सी वो आई झाँसी में.
चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

उदित हुआ सौभाग्या, मुदित महलों में उजियली च्छाई,
किंतु कालगती चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई है, विधि को भी नहीं दया आई.
निसंतान मारे राजाजी, रानी शोक-सामानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

बुझा दीप झाँसी का तब डॅल्लूसियी मान में हरसाया,
ऱाज्य हड़प करने का यह उसने अच्छा अवसर पाया,
फ़ौरन फौज भेज दुर्ग पर अपना झंडा फेहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज झाँसी आया.
अश्रुपुर्णा रानी ने देखा झाँसी हुई वीरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की मॅयैया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब वा भारत आया,
डल्हौसि ने पैर पसारे, अब तो पलट गयी काया
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया.
रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महारानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

छीनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,
क़ैद पेशवा था बिठुर में, हुआ नागपुर का भी घाट,
ऊदैपुर, तंजोर, सतारा, कर्नाटक की कौन बिसात?
जबकि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात.
बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

रानी रोई रनवासों में, बेगम गुम सी थी बेज़ार,
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे आम नीलाम छपते थे अँग्रेज़ों के अख़बार,
"नागपुर के ज़ेवर ले लो, लखनऊ के लो नौलख हार".
यों पर्दे की इज़्ज़त परदेसी के हाथ बीकानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मान में था अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धूंधूपंत पेशवा जूटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चंडी का कर दिया प्रकट आहवान.
हुआ यज्ञा प्रारंभ उन्हे तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिंगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपुर, कोल्हापुर, में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में काई वीरवर आए काम,
नाना धूंधूपंत, तांतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुंवर सिंह, सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम.
लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो क़ुर्बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दनों में,
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बड़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्ध आसमानों में.
ज़ख़्मी होकर वॉकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर, गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अँग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार.
अँग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

विजय मिली, पर अँग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुंहकी खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
यूद्ध क्षेत्र में ऊन दोनो ने भारी मार मचाई थी.
पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किंतु सामने नाला आया, था वो संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये अवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार.
घायल होकर गिरी सिंहनी, उसे वीर गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

रानी गयी सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वो सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता-नारी थी,
दिखा गयी पथ, सीखा गयी हमको जो सीख सिखानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.

जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जागावेगा स्वतंत्रता अविनासी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी.
तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.


--- सुभद्रा कुमारी चौहान - Subhadra Kumari Chauhan

Monday, 21 January 2019

AE WATAN LYRICS IN HINDI - ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू

ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू


ऐ वतन
मेरे वतन
ऐ वतन
आबाद रहे तू
आबाद रहे तू
(आबाद रहे तू)
ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
(ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू)
मैं जहाँ रहूँ, जहाँ में याद रहे तू
(मैं जहाँ रहूँ, जहाँ में याद रहे तू)
ऐ वतन, मेरे वतन
(ऐ वतन, मेरे वतन)
तू ही मेरी मंजिल, पेहचान तुझी से
(तू ही मेरी मंजिल, पेहचान तुझी से)
पोहोंचूं मैं जहां भी मेरी बुनियाद रहे तू
(पोहोंचूं मैं जहां भी मेरी बुनियाद रहे तू)
ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
मैं जहाँ रहूँ, जहाँ में याद रहे तू
ऐ वतन, मेरे वतन
(ऐ वतन, मेरे वतन)
तुझपे कोई ग़म की आंच आने नहीं दूं
(तुझपे कोई ग़म की आंच आने नहीं दूं)
कुर्बान मेरी जान तुझपे शाद रहे तू
(कुर्बान मेरी जान तुझपे शाद रहे तू)
ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
मैं जहाँ रहूँ, जहाँ में याद रहे तू
ऐ वतन (ऐ वतन), मेरे वतन (मेरे वतन)
आबाद रहे तू (ऐ वतन, मेरे वतन) (ऐ वतन, मेरे वतन)
आबाद रहे तू
ऐ वतन, मेरे वतन, आबाद रहे तू

Ae Watan – Raazi


Ae watan
Mere watan
Ae watan
Aabad rahe tu
Aabad rahe tu
(Aabad rahe tu)
Ae watan, watan mere, aabad rahe tu
Ae watan, watan mere, aabad rahe tu
(Ae watan, watan mere aabaad rahe tu)
Main jahan rahoon, jahaan mein yaad rahe tu
(Main jahan rahoon, jahaan mein yaad rahe tu)
Ae watan, mere watan
(Ae watan, mere watan)
Tu hi meri manzil, pehchaan tujhi se
(Tu hi meri manzil, pehchaan tujhi se)
Pohochun main jahan bhi meri buniyaad rahe tu
(Pohochun main jahan bhi meri buniyaad rahe tu)
Ae watan, watan mere aabad rahe tu
Main jahan rahun, jahan me yaad rahe tu
Ae watan, mere watan
(Ae watan, mere watan)
Tujhpe koi gham ki aanch aane nahin dun
(Tujhpe koi gham ki aanch aane nahin dun)
Kurbaan meri jaan tujhpe shaad rahe tu
(Kurbaan meri jaan tujhpe shaad rahe tu)
Ae watan, watan mere, aabad rahe tu
Main jahan rahun, jahaan me yaad rahe tu
Ae watan (ae watan), mere watan (mere watan)
Aabad rahe tu (ae watan, mere watan) (ae watan, mere watan)
Aabad rahe tu
Ae watan, mere watan, aabad rahe tu
Credit to :: Bollywood Ke Bol

Wednesday, 16 January 2019

Vir tum badhe chalo | वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो! Desh Bhakti Kavita

वीर तुम बढ़े चलो

वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं
हाथ में ध्वजा रहे बाल दल सजा रहे
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
प्रात हो कि रात हो संग हो न साथ हो
सूर्य से बढ़े चलो चन्द्र से बढ़े चलो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
एक ध्वज लिये हुए एक प्रण किये हुए
मातृ भूमि के लिये पितृ भूमि के लिये
अन्न भूमि में भरा वारि भूमि में भरा
यत्न कर निकाल लो रत्न भर निकाल लो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

Sare jahan se auchha | सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा। रबिन्द्रनाथ टैगोर

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी वह गुलिस्तां हमारा ॥
ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में।
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा ॥
वो संतरी हमारा वो पासवां हमारा ॥
परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का।
गुलशन है जिसके दम से रश्के जिनां हमारा॥
गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां।
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।
ऐ आबे रोदे गंगा वह दिन है याद तुझको।
उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा ॥
अब तक मगर है बाकी नामों निशां हमारा ॥
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा ॥
यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहां से।
मालूम क्या किसी को दर्दे निहां हमारा ॥
कुछ बात है कि हस्ती मिटती मिटाये।
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा ॥
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहां में।
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसतां हमारा॥
-- रबिन्द्रनाथ टैगोर

Aye Matrbhumi Teri Jai Ho | ऐ मातृभूमि! तेरी जय हो | Desh bhakti song lyrics in Hindi

ऐ मातृभूमि तेरी जय हो

ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो
प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कांतिमय हो
अज्ञान की निशा में, दुख से भरी दिशा में
तेरा प्रकोप सारे जग का महाप्रलय हो
संसार के हृदय में तेरी प्रभा उदय हो
तेरी प्रसन्नता ही आनंद का विषय हो
वह शक्ति दे कि दुख में कायर न यह हृदय हो
वह भक्ति दे कि 'बिस्मिल' सुख में तुझे न भूले
- रामप्रसाद बिस्मिल

आग बहुत-सी बाकी है | Desh Bhakti Geet

भारत क्यों तेरी साँसों के, स्वर आहत से लगते हैं,
अभी जियाले परवानों में, आग बहुत-सी बाकी है।
क्यों तेरी आँखों में पानी, आकर ठहरा-ठहरा है,
जब तेरी नदियों की लहरें, डोल-डोल मदमाती हैं।
जो गुज़रा है वह तो कल था, अब तो आज की बातें हैं,
और लड़े जो बेटे तेरे, राज काज की बातें हैं,
चक्रवात पर, भूकंपों पर, कभी किसी का ज़ोर नहीं,
और चली सीमा पर गोली, सभ्य समाज की बातें हैं।
कल फिर तू क्यों, पेट बाँधकर सोया था, मैं सुनता हूँ,
जब तेरे खेतों की बाली, लहर-लहर इतराती है।
अगर बात करनी है उनको, काश्मीर पर करने दो,
अजय अहूजा, अधिकारी, नय्यर, जब्बर को मरने दो,
वो समझौता ए लाहौरी, याद नहीं कर पाएँगे,
भूल कारगिल की गद्दारी, नई मित्रता गढ़ने दो,
ऐसी अटल अवस्था में भी, कल क्यों पल-पल टलता है,
जब मीठी परवेज़ी गोली, गीत सुना बहलाती है।
चलो ये माना थोड़ा गम है, पर किसको न होता है,
जब रातें जगने लगती हैं, तभी सवेरा सोता है,
जो अधिकारों पर बैठे हैं, वह उनका अधिकार ही है,
फसल काटता है कोई, और कोई उसको बोता है।
क्यों तू जीवन जटिल चक्र की, इस उलझन में फँसता है,
जब तेरी गोदी में बिजली कौंध-कौंध मुस्काती है।- अभिनव शुक्ला

हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल। हरिवंश राय बच्चन

हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।
चाँदी सोने हीरे मोती से सजती गुड़ियाँ।
इनसे आतंकित करने की बीत गई घड़ियाँ
इनसे सज धज बैठा करते जो हैं कठपुतले
हमने तोड़ अभी फेंकी हैं बेड़ी हथकड़ियाँ
परंपरा गत पुरखों की हमने जाग्रत की फिर से
उठा शीश पर रक्खा हमने हिम किरीट उज्जवल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।
चाँदी सोने हीरे मोती से सजवा छाते
जो अपने सिर धरवाते थे वे अब शरमाते
फूलकली बरसाने वाली टूट गई दुनिया
वज्रों के वाहन अंबर में निर्भय घहराते
इंद्रायुध भी एक बार जो हिम्मत से ओटे
छत्र हमारा निर्मित करते साठ कोटि करतल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।
- हरिवंश राय बच्चन

आज जीत की रात -- देशभक्ति पर कविता

आज जीत की रात
पहरुए! सावधान रहना
खुले देश के द्वार
अचल दीपक समान रहना

प्रथम चरण है नये स्वर्ग का
है मंज़िल का छोर
इस जन-मंथन से उठ आई
पहली रत्न-हिलोर
अभी शेष है पूरी होना
जीवन-मुक्ता-डोर
क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की
विगत साँवली कोर
ले युग की पतवार
बने अंबुधि समान रहना।

विषम शृंखलाएँ टूटी हैं
खुली समस्त दिशाएँ
आज प्रभंजन बनकर चलतीं
युग-बंदिनी हवाएँ
प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं
यह सिमटी सीमाएँ
आज पुराने सिंहासन की
टूट रही प्रतिमाएँ
उठता है तूफान, इंदु! तुम
दीप्तिमान रहना।

ऊंची हुई मशाल हमारी
आगे कठिन डगर है
शत्रु हट गया, लेकिन उसकी
छायाओं का डर है
शोषण से है मृत समाज
कमज़ोर हमारा घर है
किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी
यह विश्वास अमर है
जन-गंगा में ज्वार,
लहर तुम प्रवहमान रहना
पहरुए! सावधान रहना।।
-- गिरिजाकुमार माथुर

सरफ़रोशी की तमन्ना – राम प्रसाद बिस्मिल

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है
करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है
खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है
यूँ खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून
तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है,
हाथ जिन में हो जुनूँ कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,
है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न,
जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम
जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है|| – राम प्रसाद बिस्मिल

यारा प्यारा मेरा देश, सजा – संवारा मेरा देश॥

यारा प्यारा मेरा देश,
सजा – संवारा मेरा देश॥
दुनिया जिस पर गर्व करे,
नयन सितारा मेरा देश॥
चांदी – सोना मेरा देश,
सफ़ल सलोना मेरा देश॥
सुख का कोना मेरा देश,
फूलों वाला मेरा देश॥
झुलों वाला मेरा देश,
गंगा यमुना की माला का मेरा देश॥
फूलोँ वाला मेरा देश
आगे जाए मेरा देश॥
नित नए मुस्काएं मेरा देश
इतिहासों में नाम लिखायें मेरा देश॥

आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से

आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।
व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।
हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।
प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।
लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।
हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।
विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
-- सजीवन मयंक'

उठो, धरा के अमर सपूतों | Utho Dhara Ke Amar Saputo | Desh Bhakti Song lyrics in hindi

पुन: नया निर्माण करो

उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।
जन-जन के जीवन में फिर से
नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो।
नई उमंगें, नई तरंगें
नई प्रात है नई बात है
नया किरन है, ज्योति नई।
नई-नई मुस्कान भरो।
नई आस है, साँस नई।
युग-युग के मुरझे सुमनों में
डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।1।।
मस्त उधर मँडराते हैं।
नए स्वरों में गाते हैं।
गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें
पुन: नया निर्माण करो।।2।।
नवयुग की नूतन वीणा में
नया राग, नव गान भरो।
नई सुनहरी काया है।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
कली-कली खिल रही इधर
वह फूल-फूल मुस्काया है।
धरती माँ की आज हो रही
पुन: नया निर्माण करो।।3।।
नूतन मंगलमय ध्वनियों से
गुँजित जग-उद्यान करो।
शत-शत दीपक जला ज्ञान के
उठो, धरा के अमर सपूतों।
सरस्वती का पावन मंदिर
शुभ संपत्ति तुम्हारी है।
तुममें से हर बालक इसका
रक्षक और पुजारी है।
नवयुग का आह्वान करो।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।4।।
-द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

हम होंगे कामयाब एक दिन | Hum honge Kamyab Ek Din | Desh Bhakti Song lyrics in Hindi

होंगे कामयाब

होंगे कामयाब,
हम होंगे कामयाब एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन।
हम चलेंगे साथ-साथ, एक दिन
हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन।
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
होगी शांति चारों ओर, एक दिन
नहीं डर किसी का आज एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
होगी शांति चारों ओर एक दिन।
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
नहीं डर किसी का आज एक दिन।
गिरिजा कुमार माथुर